धर्म देखकर नारीवाद और दोहरा मापदंड: 7 कड़वे सच जो भारतीय समाज को झकझोर देंगे
गौहर खान के काम करने पर रोक को लेकर शुरू हुआ विवाद सिर्फ एक सेलिब्रिटी बहस नहीं, बल्कि भारत में मौजूद सेलेक्टिव सेकुलरिज्म और दोहरे मापदंडों की गहरी सच्चाई को उजागर करता है। सवाल यह नहीं है कि किसी महिला को उसके परिवार या धर्म के नाम पर रोका जाए या नहीं, बल्कि यह है कि ऐसी घटनाओं पर प्रतिक्रिया समान क्यों नहीं होती? अगर यही मामला किसी हिंदू परिवार से जुड़ा होता, तो देश के तमाम बुद्धिजीवी, मीडिया और सामाजिक संगठन तीखी आलोचना करते। लेकिन मुस्लिम परिवार से जुड़ा मामला होने के कारण चुप्पी साध ली जाती है। यह लेख इसी दोहरे रवैये, धार्मिक हस्तक्षेप, महिला स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी के संदर्भ में गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है।










